श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.10.42

नवम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

धुन्वन्त उत्तरासंगान् पतिं वीक्ष्य चिरागतम्।

उत्तराः कोसला माल्यैः किरन्तो ननृतुर्मुदा॥ ४२

dhunvanta uttarāsaṃgān patiṃ vīkṣya cirāgatam|

uttarāḥ kosalā mālyaiḥ kiranto nanṛturmudā|| 42

अर्थ

उस समय उत्तरकोसल देशकी रहनेवाली समस्त प्रजा अपने स्वामी भगवान्‌को बहुत दिनोंके बाद आये देख अपने दुपट्टे हिला-हिलाकर पुष्पोंकी वर्षा करती हुई आनन्दसे नाचने लगी॥ ४२॥

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