इसके बाद सीताजी और लक्ष्मणजीके साथ भगवान् श्रीरामजीने ब्राह्मण और पूजनीय गुरुजनोंको नमस्कार किया तथा सारी प्रजाने बड़े प्रेमसे सिर झुकाकर भगवान्के चरणोंमें प्रणाम किया॥ ४१॥
रामो लक्ष्मणसीताभ्यां विप्रेभ्यो येऽर्हसत्तमाः।
तेभ्यः स्वयं नमश्चक्रे प्रजाभिश्च नमस्कृतः॥ ४१
इसके बाद सीताजी और लक्ष्मणजीके साथ भगवान् श्रीरामजीने ब्राह्मण और पूजनीय गुरुजनोंको नमस्कार किया तथा सारी प्रजाने बड़े प्रेमसे सिर झुकाकर भगवान्के चरणोंमें प्रणाम किया॥ ४१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.10.41 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 58) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/10/41/