श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.10.5

नवम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

विश्‍वामित्राध्वरे येन मारीचाद्या निशाचराः।

पश्यतो लक्ष्मणस्यैव हता नैर्ऋतपुंगवाः॥ ५✎ 1130 1131

viśvāmitrādhvare yena mārīcādyā niśācarāḥ|

paśyato lakṣmaṇasyaiva hatā nair:ṛtapuṃgavāḥ|| 5

अर्थ

भगवान् श्रीरामने विश्‍वामित्रके यज्ञमें लक्ष्मणके सामने ही मारीच आदि राक्षसोंको मार डाला। वे सब बड़े-बड़े राक्षसोंकी गिनतीमें थे॥ ५॥✎ 878

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
  • #878 शब्दोंके बीचका स्थान: डाला।वे → डाला। वे
  • #1130 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): नैऋर्तपुंगवा:॥ → नैऋर्ऋतपुंगवाः॥
  • #1131 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): नैऋर्ऋतपुंगवा:॥ → नैर्ऋतपुंगवाः॥

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