परीक्षित्! जब समस्त प्राणियोंको सुख देनेवाले परम धर्मज्ञ भगवान् श्रीराम राजा हुए तब था तो त्रेतायुग, परन्तु मालूम होता था मानो सत्ययुग ही है॥ ५२॥✎ 1640
त्रेतायां वर्तमानायां कालः कृतसमोऽभवत्।
रामे राजनि धर्मज्ञे सर्वभूतसुखावहे॥ ५२
परीक्षित्! जब समस्त प्राणियोंको सुख देनेवाले परम धर्मज्ञ भगवान् श्रीराम राजा हुए तब था तो त्रेतायुग, परन्तु मालूम होता था मानो सत्ययुग ही है॥ ५२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.10.52 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 60) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/10/52/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)