श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.10.53

नवम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

वनानि नद्यो गिरयो वर्षाणि द्वीपसिन्धवः।

सर्वे कामदुघा आसन् प्रजानां भरतर्षभ॥ ५३

vanāni nadyo girayo varṣāṇi dvīpasindhavaḥ|

sarve kāmadughā āsan prajānāṃ bharatarṣabha|| 53

अर्थ

परीक्षित्! उस समय वन, नदी, पर्वत, वर्ष, द्वीप और समुद्र—सब-के-सब प्रजाके लिये कामधेनुके समान समस्त कामनाओंको पूर्ण करनेवाले बन रहे थे॥ ५३॥✎ 1640

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1640 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: सती-शिरोमणि → सतीशिरोमणि

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