श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! भगवान् श्रीरामने गुरु वसिष्ठजीको अपना आचार्य बनाकर उत्तम सामग्रियोंसे युक्त यज्ञोंके द्वारा अपने-आप ही अपने सर्वदेवस्वरूप स्वयंप्रकाश आत्माका यजन किया॥ १॥
भगवानात्मनाऽऽत्मानं राम उत्तमकल्पकैः।
सर्वदेवमयं देवमीज आचार्यवान् मखैः॥ १
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! भगवान् श्रीरामने गुरु वसिष्ठजीको अपना आचार्य बनाकर उत्तम सामग्रियोंसे युक्त यज्ञोंके द्वारा अपने-आप ही अपने सर्वदेवस्वरूप स्वयंप्रकाश आत्माका यजन किया॥ १॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.11.1 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 60) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/11/1/