श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.11.14

नवम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

तदीयं धनमानीय सर्वं राज्ञे न्यवेदयत्।

शत्रुघ्नश्‍च मधोः पुत्रं लवणं नाम राक्षसम्।

हत्वा मधुवने चक्रे मथुरां नाम वै पुरीम्॥ १४

tadīyaṃ dhanamānīya sarvaṃ rājñe nyavedayat|

śatrughnaśca madhoḥ putraṃ lavaṇaṃ nāma rākṣasam|

hatvā madhuvane cakre mathurāṃ nāma vai purīm|| 14

अर्थ

उन्होंने उनका सब धन लाकर अपने बड़े भाई भगवान् श्रीरामकी सेवामें निवेदन किया। शत्रुघ्नजीने मधुवनमें मधुके पुत्र लवण नामक राक्षसको मारकर वहाँ मथुरा नामकी पुरी बसायी॥ १४॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें