श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.11.28

नवम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

पूगैः सवृन्तै रम्भाभिः पट्टिकाभिः सुवाससाम्।

आदर्शैरंशुकैः स्रग्भिः कृतकौतुकतोरणाम्॥ २८

pūgaiḥ savṛntai rambhābhiḥ paṭṭikābhiḥ suvāsasām|

ādarśairaṃśukaiḥ sragbhiḥ kṛtakautukatoraṇām|| 28

अर्थ

वह डंठलसमेत सुपारी, केलेके खंभे और सुन्दर वस्त्रोंके पट्टोंसे सजायी हुई थी। दर्पण, वस्त्र और पुष्पमालाओंसे तथा मांगलिक चित्रकारियों और बंदनवारोंसे सारी नगरी जगमगा रही थी॥ २८॥

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