आशिषो युयुजुर्देव पाहीमां प्राक् त्वयोद्धृताम्२॥ २९
tamupeyustatra tatra paurā arhaṇapāṇayaḥ|
āśiṣo yuyujurdeva pāhīmāṃ prāk tvayoddhṛtām|| 29
अर्थ
नगरवासी अपने हाथोंमें तरह-तरहकी भेंटें लेकर भगवान्के पास आते और उनसे प्रार्थना करते कि ‘देव! पहले आपने ही वराहरूपसे पृथ्वीका उद्धार किया था; अब आप ही इसका पालन कीजिये॥ २९॥
तमुपेयुस्तत्र तत्र पौरा अर्हणपाणयः।
आशिषो युयुजुर्देव पाहीमां प्राक् त्वयोद्धृताम्॥ २९
नगरवासी अपने हाथोंमें तरह-तरहकी भेंटें लेकर भगवान्के पास आते और उनसे प्रार्थना करते कि ‘देव! पहले आपने ही वराहरूपसे पृथ्वीका उद्धार किया था; अब आप ही इसका पालन कीजिये॥ २९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.11.29 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 64) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/11/29/