श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.12.2

नवम स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

देवानीकस्ततोऽनीहः पारियात्रोऽथ तत्सुतः।

ततो बलस्थलस्तस्माद् वज्रनाभोऽर्कसंभवः॥ २

devānīkastato'nīhaḥ pāriyātro'tha tatsutaḥ|

tato balasthalastasmād vajranābho'rkasaṃbhavaḥ|| 2

अर्थ

क्षेमधन्वाका देवानीक, देवानीकका अनीह, अनीहका पारियात्र, पारियात्रका बलस्थल और बलस्थलका पुत्र हुआ वज्रनाभ। यह सूर्यका अंश था॥ २॥

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