॥ श्रीहरिः ॥
खगणस्तत्सुतस्तस्माद् विधृ१तिश्चाभवत् सुतः।
ततो हिरण्यनाभोऽभूद् योगाचार्यस्तु जैमिनेः॥ ३
khagaṇastatsutastasmād vidhṛtiścābhavat sutaḥ|
tato hiraṇyanābho'bhūd yogācāryastu jaimineḥ|| 3
अर्थ
वज्रनाभसे खगण, खगणसे विधृति और विधृतिसे हिरण्यनाभकी उत्पत्ति हुई। वह जैमिनिका शिष्य और योगाचार्य था॥ ३॥
खगणस्तत्सुतस्तस्माद् विधृतिश्चाभवत् सुतः।
ततो हिरण्यनाभोऽभूद् योगाचार्यस्तु जैमिनेः॥ ३
वज्रनाभसे खगण, खगणसे विधृति और विधृतिसे हिरण्यनाभकी उत्पत्ति हुई। वह जैमिनिका शिष्य और योगाचार्य था॥ ३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.12.3 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 65) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/12/3/टिप्पणियाँ
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विसृष्टिश्चाभवत्ततः।
(मुद्रित पृष्ठ 65)