श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.12.3

नवम स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

खगणस्तत्सुतस्तस्माद् विधृ१तिश्‍चाभवत् सुतः।

ततो हिरण्यनाभोऽभूद् योगाचार्यस्तु जैमिनेः॥ ३

khagaṇastatsutastasmād vidhṛtiścābhavat sutaḥ|

tato hiraṇyanābho'bhūd yogācāryastu jaimineḥ|| 3

अर्थ

वज्रनाभसे खगण, खगणसे विधृति और विधृतिसे हिरण्यनाभकी उत्पत्ति हुई। वह जैमिनिका शिष्य और योगाचार्य था॥ ३॥

टिप्पणियाँ

  1. १

    विसृष्टिश्‍चाभवत्ततः।

    (मुद्रित पृष्ठ 65)

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