श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.13.21

नवम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

खाण्डिक्यः कर्मतत्त्वज्ञो भीतः केशिध्वजाद‍्द्रुतः।

भानुमांस्तस्य पुत्रोऽभूच्छतद्युम्‍नस्तु तत्सुतः॥ २१

khāṇḍikyaḥ karmatattvajño bhītaḥ keśidhvajāddrutaḥ|

bhānumāṃstasya putro'bhūcchatadyumnastu tatsutaḥ|| 21

अर्थ

खाण्डिक्य था कर्मकाण्डका मर्मज्ञ। वह केशि-ध्वजसे भयभीत होकर भाग गया। केशिध्वजका पुत्र भानुमान् और भानुमान्का शतद्युम्‍न था॥ २१॥

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