श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.13.20

नवम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

कृतध्वजात् केशिध्वजः खाण्डिक्यस्तु मितध्वजात्।

कृतध्वजसुतो राजन्‍नात्मविद्याविशारदः॥ २०

kṛtadhvajāt keśidhvajaḥ khāṇḍikyastu mitadhvajāt|

kṛtadhvajasuto rājannātmavidyāviśāradaḥ|| 20

अर्थ

कृतध्वजके केशिध्वज और मितध्वजके खाण्डिक्य हुए। परीक्षित्! केशिध्वज आत्मविद्यामें बड़ा प्रवीण था॥ २०॥✎ 1641

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1641 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: केशि-ध्वज → केशिध्वज

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