॥ श्रीहरिः ॥
कृतध्वजात् केशिध्वजः खाण्डिक्यस्तु मितध्वजात्।
कृतध्वजसुतो राजन्नात्मविद्याविशारदः॥ २०
kṛtadhvajāt keśidhvajaḥ khāṇḍikyastu mitadhvajāt|
kṛtadhvajasuto rājannātmavidyāviśāradaḥ|| 20
अर्थ
कृतध्वजके केशिध्वज और मितध्वजके खाण्डिक्य हुए। परीक्षित्! केशिध्वज आत्मविद्यामें बड़ा प्रवीण था॥ २०॥✎ 1641
कृतध्वजात् केशिध्वजः खाण्डिक्यस्तु मितध्वजात्।
कृतध्वजसुतो राजन्नात्मविद्याविशारदः॥ २०
कृतध्वजके केशिध्वज और मितध्वजके खाण्डिक्य हुए। परीक्षित्! केशिध्वज आत्मविद्यामें बड़ा प्रवीण था॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.13.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 68) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/13/20/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
- #1641 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: केशि-ध्वज → केशिध्वज