श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.13.19

नवम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

कुशध्वजस्तस्य पुत्रस्ततो धर्मध्वजो नृपः।

धर्मध्वजस्य द्वौ पुत्रौ कृतध्वजमितध्वजौ॥ १९

kuśadhvajastasya putrastato dharmadhvajo nṛpaḥ|

dharmadhvajasya dvau putrau kṛtadhvajamitadhvajau|| 19

अर्थ

सीरध्वजके कुशध्वज, कुश-ध्वजके धर्मध्वज और धर्मध्वजके दो पुत्र हुए—कृतध्वज और मितध्वज॥ १९॥✎ 1641

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1641 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: केशि-ध्वज → केशिध्वज

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