राजा निमिके यज्ञमें आये हुए श्रेष्ठ मुनियोंने राजाके शरीरको सुगन्धित वस्तुओंमें रख दिया। जब सत्रयागकी समाप्ति हुई और देवतालोग आये, तब उन लोगोंने उनसे प्रार्थना की॥ ७॥
गन्धवस्तुषु तद्देहं निधाय मुनिसत्तमाः।
समाप्ते सत्रयागेऽथ देवानूचुः समागतान्॥ ७
राजा निमिके यज्ञमें आये हुए श्रेष्ठ मुनियोंने राजाके शरीरको सुगन्धित वस्तुओंमें रख दिया। जब सत्रयागकी समाप्ति हुई और देवतालोग आये, तब उन लोगोंने उनसे प्रार्थना की॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.13.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 67) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/13/7/