श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.13.7

नवम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

गन्धवस्तुषु तद्देहं१ निधाय मुनिसत्तमाः।

समाप्ते सत्रयागेऽथ देवानूचुः समागतान्॥ ७

gandhavastuṣu taddehaṃ nidhāya munisattamāḥ|

samāpte satrayāge'tha devānūcuḥ samāgatān|| 7

अर्थ

राजा निमिके यज्ञमें आये हुए श्रेष्ठ मुनियोंने राजाके शरीरको सुगन्धित वस्तुओंमें रख दिया। जब सत्रयागकी समाप्ति हुई और देवतालोग आये, तब उन लोगोंने उनसे प्रार्थना की॥ ७॥

टिप्पणियाँ

  1. १

    तं देहं।

    (मुद्रित पृष्ठ 67)

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