श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.13.8

नवम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

राज्ञो जीवतु देहोऽयं प्रसन्‍नाः प्रभवो यदि।

तथेत्युक्ते निमिः प्राह मा भून्मे देहबन्धनम्॥ ८

rājño jīvatu deho'yaṃ prasannāḥ prabhavo yadi|

tathetyukte nimiḥ prāha mā bhūnme dehabandhanam|| 8

अर्थ

‘महानुभावो! आपलोग समर्थ हैं। यदि आप प्रसन्‍न हैं तो राजा निमिका यह शरीर पुनः जीवित हो उठे।’ देवताओंने कहा—‘ऐसा ही हो।’ उस समय निमिने कहा—‘मुझे देहका बन्धन नहीं चाहिये॥ ८॥

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