vatsyatyapatyāni ca te bhaviṣyantyaparāṇi bhoḥ|| 39
अर्थ
तो फिर तुम धीरज धरो। तुम राजराजेश्वर हो। घबराओ मत। प्रति एक वर्षके बाद एक रात तुम मेरे साथ रहोगे। तब तुम्हारे और भी सन्तानें होंगी॥ ३९॥
संवत्सरान्ते हि भवानेकरात्रं मयेश्वर।
वत्स्यत्यपत्यानि च ते भविष्यन्त्यपराणि भोः॥ ३९
तो फिर तुम धीरज धरो। तुम राजराजेश्वर हो। घबराओ मत। प्रति एक वर्षके बाद एक रात तुम मेरे साथ रहोगे। तब तुम्हारे और भी सन्तानें होंगी॥ ३९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.14.39 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 74) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/14/39/