श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.14.40

नवम स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

अन्तर्वत्‍नीमुपालक्ष्य देवीं स प्रययौ पुरम्।

पुनस्तत्र गतोऽब्दान्ते उर्वशीं वीरमातरम्॥ ४०

antarvatnīmupālakṣya devīṃ sa prayayau puram|

punastatra gato'bdānte urvaśīṃ vīramātaram|| 40

अर्थ

राजा पुरूरवाने देखा कि उर्वशी गर्भवती है, इसलिये वे अपनी राजधानीमें लौट आये। एक वर्षके बाद फिर वहाँ गये। तबतक उर्वशी एक वीर पुत्रकी माता हो चुकी थी॥ ४०॥

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