अनुक्रमणिका नवम स्कन्ध अध्याय 14 श्लोक 49 ॥ श्रीहरिः ॥
पुरूरवस एवासीत् त्रयी त्रेतामुखे नृप।
अग्निना प्रजया राजा लोकं गान्धर्वमेयिवान्॥ ४९
purūravasa evāsīt trayī tretāmukhe nṛpa|
agninā prajayā rājā lokaṃ gāndharvameyivān|| 49
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परीक्षित्! त्रेताके प्रारम्भमें पुरूरवासे ही वेदत्रयी और अग्नित्रयीका आविर्भाव हुआ। राजा पुरूरवाने अग्निको सन्तानरूपसे स्वीकार करके गन्धर्वलोककी प्राप्ति की॥ ४९॥
इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां नवमस्कन्धे ऐलोपाख्याने चतुर्दशोऽध्यायः॥ १४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.14.49 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 75) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/14/49/
मुद्रित ग्रन्थमें: द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 75
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पुरूरवस एवासीत् त्रयी त्रेतामुखे नृप।
अग्निना प्रजया राजा लोकं गान्धर्वमेयिवान्॥ ४९
परीक्षित्! त्रेताके प्रारम्भमें पुरूरवासे ही वेदत्रयी और अग्नित्रयीका आविर्भाव हुआ। राजा पुरूरवाने अग्निको सन्तानरूपसे स्वीकार करके गन्धर्वलोककी प्राप्ति की॥ ४९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.14.49 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 75) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/14/49/