श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.15.1

नवम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

अथ पञ्चदशोऽध्यायः

ऋचीक, जमदग्‍नि और परशुरामजीका चरित्र

श्रीशुक२ उवाच

ऐलस्य चोर्वशीगर्भात् षडासन्‍नात्मजा नृप।

आयुः श्रुतायुः सत्यायू रयोऽथ विजयो जयः॥ १

ailasya corvaśīgarbhāt ṣaḍāsannātmajā nṛpa|

āyuḥ śrutāyuḥ satyāyū rayo'tha vijayo jayaḥ|| 1

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! उर्वशीके गर्भसे पुरूरवाके छः पुत्र हुए—आयु, श्रुतायु, सत्यायु, रय, विजय और जय॥ १॥

टिप्पणियाँ

  1. २

    बादरायणिरुवाच।

    (मुद्रित पृष्ठ 75)

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