श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.15.11

नवम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

प्रसादितः सत्यवत्या मैवं भूदिति भार्गवः।

अथ तर्हि भवेत् पौत्रो जमदग्‍निस्ततोऽभवत्॥ ११

prasāditaḥ satyavatyā maivaṃ bhūditi bhārgavaḥ|

atha tarhi bhavet pautro jamadagnistato'bhavat|| 11

अर्थ

सत्यवतीने ऋचीक मुनिको प्रसन्‍न किया और प्रार्थना की कि ‘स्वामी! ऐसा नहीं होना चाहिये।’ तब उन्होंने कहा—‘अच्छी बात है। पुत्रके बदले तुम्हारा पौत्र वैसा (घोर प्रकृतिका) होगा।’ समयपर सत्यवतीके गर्भसे जमदग्‍निका जन्म हुआ॥ ११॥✎ 879

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #879 शब्दोंके बीचका स्थान: कियाथा—फिर → किया था—फिर

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