श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.15.12

नवम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

सा चाभूत् सुमहापुण्या कौशिकी लोकपावनी।

रेणोः सुतां रेणुकां वै जमदग्‍निरुवाह याम्॥ १२

sā cābhūt sumahāpuṇyā kauśikī lokapāvanī|

reṇoḥ sutāṃ reṇukāṃ vai jamadagniruvāha yām|| 12

अर्थ

सत्यवती समस्त लोकोंको पवित्र करनेवाली परम पुण्यमयी ‘कौशिकी’ नदी बन गयी। रेणु ऋषिकी कन्या थी रेणुका। जमदग्‍निने उसका पाणिग्रहण किया॥ १२॥✎ 879

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #879 शब्दोंके बीचका स्थान: कियाथा—फिर → किया था—फिर

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