राजा परीक्षित्ने पूछा—भगवन्! अवश्य ही उस समयके क्षत्रिय विषयलोलुप हो गये थे; परन्तु उन्होंने परशुरामजीका ऐसा कौन-सा अपराध कर दिया, जिसके कारण उन्होंने बार-बार क्षत्रियोंके वंशका संहार किया?॥ १६॥
किं तदंहो भगवतो राजन्यैरजितात्मभिः।
कृतं येन कुलं नष्टं क्षत्रियाणामभीक्ष्णशः॥ १६
राजा परीक्षित्ने पूछा—भगवन्! अवश्य ही उस समयके क्षत्रिय विषयलोलुप हो गये थे; परन्तु उन्होंने परशुरामजीका ऐसा कौन-सा अपराध कर दिया, जिसके कारण उन्होंने बार-बार क्षत्रियोंके वंशका संहार किया?॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.15.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 77) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/15/16/