एक दिन सहस्रबाहु अर्जुन शिकार खेलनेके लिये बड़े घोर जंगलमें निकल गया था। दैववश वह जमदग्नि मुनिके आश्रमपर जा पहुँचा॥ २३॥
स एकदा तु मृगयां विचरन् विपिने वने।
यदृच्छयाऽऽश्रमपदं जमदग्नेरुपाविशत्॥ २३
एक दिन सहस्रबाहु अर्जुन शिकार खेलनेके लिये बड़े घोर जंगलमें निकल गया था। दैववश वह जमदग्नि मुनिके आश्रमपर जा पहुँचा॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.15.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 78) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/15/23/