॥ श्रीहरिः ॥
तस्मै स नरदेवाय मुनिरर्हणमाहरत्।
ससैन्यामात्यवाहाय हविष्मत्या तपोधनः॥ २४
tasmai sa naradevāya munirarhaṇamāharat|
sasainyāmātyavāhāya haviṣmatyā tapodhanaḥ|| 24
अर्थ
परम तपस्वी जमदग्नि मुनिके आश्रममें कामधेनु रहती थी। उसके प्रतापसे उन्होंने सेना, मन्त्री और वाहनोंके साथ हैहयाधिपतिका खूब स्वागत-सत्कार किया॥ २४॥
तस्मै स नरदेवाय मुनिरर्हणमाहरत्।
ससैन्यामात्यवाहाय हविष्मत्या तपोधनः॥ २४
परम तपस्वी जमदग्नि मुनिके आश्रममें कामधेनु रहती थी। उसके प्रतापसे उन्होंने सेना, मन्त्री और वाहनोंके साथ हैहयाधिपतिका खूब स्वागत-सत्कार किया॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.15.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 78) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/15/24/