ते च माहिष्मतीं निन्युः सवत्सां क्रन्दतीं बलात्॥ २६
havirdhānīmṛṣerdarpānnarān hartumacodayat|
te ca māhiṣmatīṃ ninyuḥ savatsāṃ krandatīṃ balāt|| 26
अर्थ
उसने अभिमानवश जमदग्नि मुनिसे माँगा भी नहीं, अपने सेवकोंको आज्ञा दी कि कामधेनुको छीन ले चलो। उसकी आज्ञासे उसके सेवक बछड़ेके साथ ‘बाँ-बाँ’ डकराती हुई कामधेनुको बलपूर्वक माहिष्मतीपुरी ले गये॥ २६॥
हविर्धानीमृषेर्दर्पान्नरान् हर्तुमचोदयत्।
ते च माहिष्मतीं निन्युः सवत्सां क्रन्दतीं बलात्॥ २६
उसने अभिमानवश जमदग्नि मुनिसे माँगा भी नहीं, अपने सेवकोंको आज्ञा दी कि कामधेनुको छीन ले चलो। उसकी आज्ञासे उसके सेवक बछड़ेके साथ ‘बाँ-बाँ’ डकराती हुई कामधेनुको बलपूर्वक माहिष्मतीपुरी ले गये॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.15.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 78) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/15/26/