जब गाधिने यह बात कही, तब ऋचीक मुनि उनका आशय समझ गये और वरुणके पास जाकर वैसे ही घोड़े ले आये तथा उन्हें देकर सुन्दरी सत्यवतीसे विवाह कर लिया॥ ७॥✎ 879
इत्युक्तस्तन्मतं ज्ञात्वा गतः स वरुणान्तिकम्।
आनीय दत्त्वा तानश्वानुपयेमे वराननाम्॥ ७
जब गाधिने यह बात कही, तब ऋचीक मुनि उनका आशय समझ गये और वरुणके पास जाकर वैसे ही घोड़े ले आये तथा उन्हें देकर सुन्दरी सत्यवतीसे विवाह कर लिया॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.15.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 76) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/15/7/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#879 शब्दोंके बीचका स्थान: कियाथा—फिर → किया था—फिर