॥ श्रीहरिः ॥
पितुः कायेन सन्धाय शिर आदाय बर्हिषि।
सर्वदेवमयं देवमात्मानमयजन्मखैः॥ २०
pituḥ kāyena sandhāya śira ādāya barhiṣi|
sarvadevamayaṃ devamātmānamayajanmakhaiḥ|| 20
अर्थ
परशुरामजीने अपने पिताजीका सिर लाकर उनके धड़से जोड़ दिया और यज्ञोंद्वारा सर्वदेवमय आत्मस्वरूप भगवान्का यजन किया॥ २०॥
पितुः कायेन सन्धाय शिर आदाय बर्हिषि।
सर्वदेवमयं देवमात्मानमयजन्मखैः॥ २०
परशुरामजीने अपने पिताजीका सिर लाकर उनके धड़से जोड़ दिया और यज्ञोंद्वारा सर्वदेवमय आत्मस्वरूप भगवान्का यजन किया॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.16.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 82) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/16/20/