श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.16.21

नवम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

ददौ प्राचीं दिशं होत्रे ब्रह्मणे दक्षिणां दिशम्।

अध्वर्यवे प्रतीचीं वै उद्गात्रे उत्तरां दिशम्॥ २१

dadau prācīṃ diśaṃ hotre brahmaṇe dakṣiṇāṃ diśam|

adhvaryave pratīcīṃ vai udgātre uttarāṃ diśam|| 21

अर्थ

यज्ञोंमें उन्होंने पूर्व दिशा होताको, दक्षिण दिशा ब्रह्माको, पश्‍चिम दिशा अध्वर्युको और उत्तर दिशा सामगान करनेवाले उद्गाताको दे दी॥ २१॥

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