॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 9.16.36
एष वः कुशिका वीरो देवरातस्तमन्वित।
अन्ये चाष्टकहारीतजयक्रतुमदादयः॥ ३६
eṣa vaḥ kuśikā vīro devarātastamanvita|
anye cāṣṭakahārītajayakratumadādayaḥ|| 36
अर्थ
मेरे प्यारे पुत्रो! यह देवरात शुनःशेप भी तुम्हारे ही गोत्रका है। तुमलोग इसकी आज्ञामें रहना।’ परीक्षित्! विश्वामित्रजीके अष्टक, हारीत, जय और क्रतुमान् आदि और भी पुत्र थे॥ ३६॥