एवं कौशिकगोत्रं तु विश्वामित्रैः पृथग्विधम्।
प्रवरान्तरमापन्नं तद्धि चैवं प्रकल्पितम्॥ ३७
इस प्रकार विश्वामित्रजीकी सन्तानोंसे कौशिकगोत्रमें कई भेद हो गये और देवरातको बड़ा भाई माननेके कारण उसका प्रवर ही दूसरा हो गया॥ ३७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.16.37 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 84) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/16/37/