श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.17.1

नवम स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

अथ सप्तदशोऽध्यायः

क्षत्रवृद्ध, रजि आदि राजाओंके वंशका वर्णन

श्रीशुक उवाच

यः पुरूरवसः पुत्र आयुस्तस्याभवन् सुताः।

नहुषः क्षत्रवृद्धश्‍च रजी रम्भश्‍च वीर्यवान्॥ १

yaḥ purūravasaḥ putra āyustasyābhavan sutāḥ|

nahuṣaḥ kṣatravṛddhaśca rajī rambhaśca vīryavān|| 1

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! राजेन्द्र पुरूरवाका एक पुत्र था आयु। उसके पाँच लड़के हुए—नहुष, क्षत्रवृद्ध, रजि, शक्तिशाली रम्भ और अनेना। अब क्षत्रवृद्धका वंश सुनो। क्षत्रवृद्धके पुत्र थे सुहोत्र। सुहोत्रके तीन पुत्र हुए—काश्य, कुश और गृत्समद। गृत्समदका पुत्र हुआ शुनक। इसी शुनकके पुत्र ऋग्वेदियोंमें श्रेष्ठ मुनिवर शौनकजी हुए॥ १—३॥

यह अर्थ श्लोक 1–3 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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