॥ श्रीहरिः ॥
इतीमे काशयो भूपाः क्षत्रवृद्धान्वयायिनः।
रम्भस्य१ रभसः पुत्रो गम्भीरश्चा२क्रियस्ततः॥ १०
itīme kāśayo bhūpāḥ kṣatravṛddhānvayāyinaḥ|
rambhasya rabhasaḥ putro gambhīraścākriyastataḥ|| 10
अर्थ
ये सब-के-सब क्षत्रवृद्धके वंशमें काशिसे उत्पन्न नरपति हुए। रम्भके पुत्रका नाम था रभस, उससे गम्भीर और गम्भीरसे अक्रियका जन्म हुआ॥ १०॥
इतीमे काशयो भूपाः क्षत्रवृद्धान्वयायिनः।
रम्भस्य रभसः पुत्रो गम्भीरश्चाक्रियस्ततः॥ १०
ये सब-के-सब क्षत्रवृद्धके वंशमें काशिसे उत्पन्न नरपति हुए। रम्भके पुत्रका नाम था रभस, उससे गम्भीर और गम्भीरसे अक्रियका जन्म हुआ॥ १०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.17.10 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 85) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/17/10/टिप्पणियाँ
- १
नाभस्य।
(मुद्रित पृष्ठ 85) - २
श्चक्रकस्ततः।
(मुद्रित पृष्ठ 85)