श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.17.11

नवम स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

तस्य क्षेत्रे ब्रह्म जज्ञे शृणु वंशमनेनसः।

शुद्धस्ततः३ शुचिस्तस्मात् त्रिककुद् धर्मसारथिः॥ ११

tasya kṣetre brahma jajñe śṛṇu vaṃśamanenasaḥ|

śuddhastataḥ śucistasmāt trikakud dharmasārathiḥ|| 11

अर्थ

अक्रियकी पत्‍नीसे ब्राह्मणवंश चला। अब अनेनाका वंश सुनो। अनेनाका पुत्र था शुद्ध, शुद्धका शुचि, शुचिका त्रिककुद् और त्रिककुद्का धर्मसारथि॥ ११॥

टिप्पणियाँ

  1. ३

    शुद्धः शुचिस्ततस्तस्मा०।

    (मुद्रित पृष्ठ 85)

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