श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.17.18

नवम स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

संकृतिस्तस्य च५ जयः क्षत्रधर्मा महारथः।

क्षत्रवृद्धान्वया भूपाः शृणु वंशं च नाहुषात्॥ १८

saṃkṛtistasya ca jayaḥ kṣatradharmā mahārathaḥ|

kṣatravṛddhānvayā bhūpāḥ śṛṇu vaṃśaṃ ca nāhuṣāt|| 18

अर्थ

जयसेनका संकृति, संकृतिका पुत्र हुआ महारथी वीरशिरोमणि जय। क्षत्रवृद्धकी वंश-परम्परामें इतने ही नरपति हुए। अब नहुषवंशका वर्णन सुनो॥ १८॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां नवमस्कन्धे
चन्द्रवंशानुवर्णने सप्तदशोऽध्यायः॥ १७॥

टिप्पणियाँ

  1. ५

    तनयः।

    (मुद्रित पृष्ठ 85)

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