श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.17.4

नवम स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

काश्यस्य काशिस्तत्पुत्रो राष्ट्रो दीर्घतमःपिता।

धन्वन्तरिर्दैर्घतम आयुर्वेदप्रवर्तकः॥ ४

kāśyasya kāśistatputro rāṣṭro dīrghatamaḥpitā|

dhanvantarirdairghatama āyurvedapravartakaḥ|| 4

अर्थ

काश्यका पुत्र काशि, काशिका राष्ट्र, राष्ट्रका दीर्घतमा और दीर्घतमाके धन्वन्तरि। यही आयुर्वेदके प्रवर्तक हैं॥ ४॥

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