श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.17.5

नवम स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

यज्ञभुग् वासुदेवांशः स्मृतमात्रार्तिनाशनः।

तत्पुत्रः केतुमानस्य जज्ञे भीमरथस्ततः॥ ५

yajñabhug vāsudevāṃśaḥ smṛtamātrārtināśanaḥ|

tatputraḥ ketumānasya jajñe bhīmarathastataḥ|| 5

अर्थ

ये यज्ञभागके भोक्ता और भगवान् वासुदेवके अंश हैं। इनके स्मरणमात्रसे ही सब प्रकारके रोग दूर हो जाते हैं। धन्वन्तरिका पुत्र हुआ केतुमान् और केतुमान्का भीमरथ॥ ५॥

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