na tvamagrajavad vatsa māṃ pratyākhyātumarhasi|| 42
अर्थ
अब ययातिने अवस्थामें सबसे छोटे किन्तु गुणोंमें बड़े अपने पुत्र पूरुको बुलाकर पूछा और कहा—‘बेटा! अपने बड़े भाइयोंके समान तुम्हें तो मेरी बात नहीं टालनी चाहिये’॥ ४२॥
अपृच्छत् तनयं पूरुं वयसोनं गुणाधिकम्।
न त्वमग्रजवद् वत्स मां प्रत्याख्यातुमर्हसि॥ ४२
अब ययातिने अवस्थामें सबसे छोटे किन्तु गुणोंमें बड़े अपने पुत्र पूरुको बुलाकर पूछा और कहा—‘बेटा! अपने बड़े भाइयोंके समान तुम्हें तो मेरी बात नहीं टालनी चाहिये’॥ ४२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.18.42 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 90) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/18/42/