श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.18.48

नवम स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

अयजद् यज्ञपुरुषं क्रतुभिर्भूरिदक्षिणैः।

सर्वदेवमयं देवं सर्ववेदमयं हरिम्॥ ४८

ayajad yajñapuruṣaṃ kratubhirbhūridakṣiṇaiḥ|

sarvadevamayaṃ devaṃ sarvavedamayaṃ harim|| 48

अर्थ

राजा ययातिने समस्त वेदोंके प्रतिपाद्य सर्वदेवस्वरूप यज्ञपुरुष भगवान् श्रीहरिका बहुत-से बड़ी-बड़ी दक्षिणावाले यज्ञोंसे यजन किया॥ ४८॥

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