॥ श्रीहरिः ॥
अयजद् यज्ञपुरुषं क्रतुभिर्भूरिदक्षिणैः।
सर्वदेवमयं देवं सर्ववेदमयं हरिम्॥ ४८
ayajad yajñapuruṣaṃ kratubhirbhūridakṣiṇaiḥ|
sarvadevamayaṃ devaṃ sarvavedamayaṃ harim|| 48
अर्थ
राजा ययातिने समस्त वेदोंके प्रतिपाद्य सर्वदेवस्वरूप यज्ञपुरुष भगवान् श्रीहरिका बहुत-से बड़ी-बड़ी दक्षिणावाले यज्ञोंसे यजन किया॥ ४८॥
अयजद् यज्ञपुरुषं क्रतुभिर्भूरिदक्षिणैः।
सर्वदेवमयं देवं सर्ववेदमयं हरिम्॥ ४८
राजा ययातिने समस्त वेदोंके प्रतिपाद्य सर्वदेवस्वरूप यज्ञपुरुष भगवान् श्रीहरिका बहुत-से बड़ी-बड़ी दक्षिणावाले यज्ञोंसे यजन किया॥ ४८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.18.48 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 91) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/18/48/