॥ श्रीहरिः ॥
वासुदेवे भगवति सर्वात्मनि परेऽमले।
एकान्तित्वं गतो भक्त्या सर्वभूतसुहृत् समः॥ ११
vāsudeve bhagavati sarvātmani pare'male|
ekāntitvaṃ gato bhaktyā sarvabhūtasuhṛt samaḥ|| 11
अर्थ
वह समस्त प्राणियोंका अहैतुक हितैषी एवं सबके प्रति समान भावसे युक्त होकर भक्तिके द्वारा परम विशुद्ध सर्वात्मा भगवान् वासुदेवका अनन्य प्रेमी हो गया॥ ११॥
वासुदेवे भगवति सर्वात्मनि परेऽमले।
एकान्तित्वं गतो भक्त्या सर्वभूतसुहृत् समः॥ ११
वह समस्त प्राणियोंका अहैतुक हितैषी एवं सबके प्रति समान भावसे युक्त होकर भक्तिके द्वारा परम विशुद्ध सर्वात्मा भगवान् वासुदेवका अनन्य प्रेमी हो गया॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.2.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 12) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/2/11/