श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.2.16

नवम स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

करूषान्मानवादासन् कारूषाः क्षत्रजातयः।

उत्तरापथगोप्तारो ब्रह्मण्या धर्मवत्सलाः॥ १६

karūṣānmānavādāsan kārūṣāḥ kṣatrajātayaḥ|

uttarāpathagoptāro brahmaṇyā dharmavatsalāḥ|| 16

अर्थ

मनुपुत्र करूषसे कारूष नामक क्षत्रिय उत्पन्‍न हुए। वे बड़े ही ब्राह्मणभक्त, धर्मप्रेमी एवं उत्तरापथके रक्षक थे॥ १६॥

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