श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.2.22

नवम स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

ततो ब्रह्मकुलं जातमाग्‍निवेश्यायनं नृप।

नरिष्यन्तान्वयः प्रोक्तो दिष्टवंशमतः शृणु॥ २२

tato brahmakulaṃ jātamāgniveśyāyanaṃ nṛpa|

nariṣyantānvayaḥ prokto diṣṭavaṃśamataḥ śṛṇu|| 22

अर्थ

परीक्षित्! ब्राह्मणोंका ‘आग्‍निवेश्यायन’ गोत्र उन्हींसे चला है। इस प्रकार नरिष्यन्तके वंशका मैंने वर्णन किया, अब दिष्टका वंश सुनो॥ २२॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें