श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.2.23

नवम स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

नाभागो दिष्टपुत्रोऽन्यः कर्मणा वैश्यतां गतः।

भलन्दनः सुतस्तस्य वत्सप्रीतिर्भलन्दनात्॥ २३

nābhāgo diṣṭaputro'nyaḥ karmaṇā vaiśyatāṃ gataḥ|

bhalandanaḥ sutastasya vatsaprītirbhalandanāt|| 23

अर्थ

दिष्टके पुत्रका नाम था नाभाग। यह उस नाभागसे अलग है, जिसका मैं आगे वर्णन करूँगा। वह अपने कर्मके कारण वैश्य हो गया। उसका पुत्र हुआ भलन्दन और उसका वत्सप्रीति॥ २३॥

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