श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.2.24

नवम स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

वत्सप्रीतेः सुतः प्रांशुस्तत्सुतं प्रमतिं विदुः।

खनित्रः प्रमतेस्तस्माच्चाक्षुषोऽथ विविंशतिः॥ २४

vatsaprīteḥ sutaḥ prāṃśustatsutaṃ pramatiṃ viduḥ|

khanitraḥ pramatestasmāccākṣuṣo'tha viviṃśatiḥ|| 24

अर्थ

वत्सप्रीतिका प्रांशु और प्रांशुका पुत्र हुआ प्रमति। प्रमतिके खनित्र, खनित्रके चाक्षुष और उनके विविंशति हुए॥ २४॥

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