saṃvarto'yājayad yaṃ vai mahāyogyaṃgiraḥsutaḥ|| 26
अर्थ
विविंशतिके पुत्र रम्भ और रम्भके पुत्र खनिनेत्र—दोनों ही परम धार्मिक हुए। उनके पुत्र करन्धम और करन्धमके अवीक्षित्। महाराज परीक्षित्! अवीक्षित्के पुत्र मरुत्त चक्रवर्ती राजा हुए। उनसे अंगिराके पुत्र महायोगी संवर्त्त ऋषिने यज्ञ कराया था॥ २५-२६॥
यह अर्थ श्लोक 25–26 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।
तस्यावीक्षित् सुतो यस्य मरुत्तश्चक्रवर्त्यभूत्।
संवर्तोऽयाजयद् यं वै महायोग्यंगिरःसुतः॥ २६
विविंशतिके पुत्र रम्भ और रम्भके पुत्र खनिनेत्र—दोनों ही परम धार्मिक हुए। उनके पुत्र करन्धम और करन्धमके अवीक्षित्। महाराज परीक्षित्! अवीक्षित्के पुत्र मरुत्त चक्रवर्ती राजा हुए। उनसे अंगिराके पुत्र महायोगी संवर्त्त ऋषिने यज्ञ कराया था॥ २५-२६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.2.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 13) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/2/26/