श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.2.6

नवम स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

खड्गमादाय तरसा प्रलीनोडुगणे निशि।

अजानन्‍नहनद् बभ्रोः शिरः शार्दूलशंकया॥ ६

khaḍgamādāya tarasā pralīnoḍugaṇe niśi|

ajānannahanad babhroḥ śiraḥ śārdūlaśaṃkayā|| 6

अर्थ

एक तो रातका समय और दूसरे घनघोर घटाओंसे आच्छादित होनेके कारण तारे भी नहीं दीखते थे। उसने हाथमें तलवार उठाकर अनजानमें ही बड़े वेगसे गायका सिर काट दिया। वह समझ रहा था कि यही बाघ है॥ ६॥

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