श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.21.18

नवम स्कन्ध · अध्याय 21 · अथैकविंशोऽध्यायः

तत्प्रसंगानुभावेन रन्तिदेवानुवर्तिनः।

अभवन् योगिनः सर्वे नारायणपरायणाः॥ १८

tatprasaṃgānubhāvena rantidevānuvartinaḥ|

abhavan yoginaḥ sarve nārāyaṇaparāyaṇāḥ|| 18

अर्थ

रन्तिदेवके अनुयायी भी उनके संगके प्रभावसे योगी हो गये और सब भगवान्‌के ही आश्रित परम भक्त बन गये॥ १८॥✎ 881

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #881 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् से → भगवान्‌से

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