॥ श्रीहरिः ॥
जैगीषव्योपदेशेन योगतन्त्रं चकार ह।
उदक्स्वनस्ततस्तस्माद् भल्लादो बार्हदीषवाः॥ २६
jaigīṣavyopadeśena yogatantraṃ cakāra ha|
udaksvanastatastasmād bhallādo bārhadīṣavāḥ|| 26
अर्थ
इसी विष्वक्सेनने जैगीषव्यके उपदेशसे योगशास्त्रकी रचना की। विष्वक्सेनका पुत्र था उदक्स्वन और उदक्स्वनका भल्लाद। ये सब बृहदिषुके वंशज हुए॥ २६॥
जैगीषव्योपदेशेन योगतन्त्रं चकार ह।
उदक्स्वनस्ततस्तस्माद् भल्लादो बार्हदीषवाः॥ २६
इसी विष्वक्सेनने जैगीषव्यके उपदेशसे योगशास्त्रकी रचना की। विष्वक्सेनका पुत्र था उदक्स्वन और उदक्स्वनका भल्लाद। ये सब बृहदिषुके वंशज हुए॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.21.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 102) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/21/26/