श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.21.27

नवम स्कन्ध · अध्याय 21 · अथैकविंशोऽध्यायः

यवीनरो द्विमीढस्य कृतिमांस्तत्सुतः स्मृतः।

नाम्‍ना सत्यधृतिर्यस्य दृढनेमिः सुपार्श्‍वकृत्॥ २७

yavīnaro dvimīḍhasya kṛtimāṃstatsutaḥ smṛtaḥ|

nāmnā satyadhṛtiryasya dṛḍhanemiḥ supārśvakṛt|| 27

अर्थ

द्विमीढका पुत्र था यवीनर, यवीनरका कृतिमान्, कृतिमान्का सत्यधृति, सत्यधृतिका दृढनेमि और दृढ-नेमिका पुत्र सुपार्श्‍व हुआ॥ २७॥

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