श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.21.28

नवम स्कन्ध · अध्याय 21 · अथैकविंशोऽध्यायः

सुपार्श्‍वात् सुमतिस्तस्य पुत्रः सन्‍नतिमांस्ततः।

कृतिर्हिरण्यनाभाद् यो योगं प्राप्य जगौ स्म षट्॥ २८

supārśvāt sumatistasya putraḥ sannatimāṃstataḥ|

kṛtirhiraṇyanābhād yo yogaṃ prāpya jagau sma ṣaṭ|| 28

अर्थ

सुपार्श्‍वसे सुमति, सुमतिसे सन्‍नतिमान् और सन्‍नतिमान्से कृतिका जन्म हुआ। उसने हिरण्यनाभसे योगविद्या प्राप्त की थी और ‘प्राच्यसाम’ नामक ऋचाओंकी छः संहिताएँ कही थीं। कृतिका पुत्र नीप था, नीपका उग्रायुध, उग्रायुधका क्षेम्य, क्षेम्यका सुवीर और सुवीरका पुत्र था रिपुंजय॥ २८-२९॥

यह अर्थ श्लोक 28–29 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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